Masiha ke mohabbath ka

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मसीहा की मोहब्बत का करें कैसे बयां कोई किसी के वास्ते देता है अपनी जा कहा कोई 1 भरे जो दिल के जख़्मों को बने वो प्यार का मरहम 2 वो दरिया प्यार का तू है मिले तुझसा कहा कोई 2 मेरी राहों के सब कांटे उठा ले अपनी पलकों से 2 नहीं इस तौर करता प्यार कोई अब यहाँ कोई