Memne ke pavan lahu - Kunjattin thiru (1629)

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मेमने के पावन लहू से में शुद्ध होगया हू उस लहू के ही वास्ते में जय जय गावुंगा महिमा स्तुती हो उदारक येशु को दलदल के कीच से मुझको उबारा स्तूति करूंगा में जीवन बार तुझको आनंद से अर्पण करूंगा घोषित करूंगा चिलाकर इस सीयों यात्रा में आगे को ही में डोडूंगा मेरे लक्ष को पाने को निश्चित में पावूंगा मेरे विरासत को शत्रु वह कदापि चीन न पाएगा पावूंगा उस दिन में येशु के हाथ से दूथों के उपस्थिति में महिमा से बरा सियों में शिक्क्र ही पोचूंगा मेरे सारे दर्द होगा बी दूर वहा में पोछने पर अनंतकाल आनंद को पावूंगा वहा पर शत्रु बी कदापि छीन न पाएगा आनंद से बरूंगा खुशी से गावूंगा राजा येशु के चरण में