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मेरा प्रिय मेरा दाहिना हाथ तामकर
चलाता है मुझे दिन प्रतिदिन
आनंदित समय में दूको के वक्त में
मुझे न छोड़ेगा ना टलेगा
दिगूंगा नही में दिगुंगा नही में
समसिया अधिक आने पर बी
गिरूंगा नही में गिरूंगा नही में
कटिनाएं अत्यंत आने पर बी
प्रिया संभालेगा प्रिया चलाएगा
वही लेजायेगा अंतिम क्षण तक
आगे लाल समुंदर अशेप करनेपर
शत्रु सेना पीछा करने पर बी
समुंदर में बी रास्ता को बनाया
पोचाएगा हमे जयवंत होकर
गरजने वाला सिंह रहता गुफेमे
दानियाल के समान गिर जाने पर
सिंह को बनाया मेरा प्रेमी प्रभु
आंख की पुतली जैसे संभालेगा
मिट्टी से मिट्टी में मिलजाने पर बी
हाथ न छोड़ेगा मेरा कबी
मुझे जिलाएगा नए शरीर के साथ
स्वीकार करेगा महिमा में