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मेरा येशु मेरे हित भला
वो है सर्वदा मेरे लिए काफी
विपथी बीमारी हर परेशानी मे,
मेरे लिए हरदम वो काफी
कालवरी क्रूस पर वो मारा
काँटों का मुकुट धारण किया
मेरे सारे दर्दों को वो दूर करके
नया जीवन मुझे दे दिया
येशु ही आदि और अंत भी,
अनमोल प्रेम का भी श्रोता वो है
दस हज़र्रों मे भी आथी श्रेष्ट है वो
आदर महिमा के योग्य प्रभु
मेरे सारे क्लेश होंगे दूर,
सारे असुवों को पोंछेगा
येशु राजा बनकर जब प्रकट होगा
में उसके संग स्वर्ग जाऊंगा
मरुस्तल सफर है आथी क्रूर,
प्रथिरोध है हर पल मुझे
दिन में मेघ का स्तम्भ रात मे अग्नि स्तम्भ
मेरा मार्ग मार्गदर्शन वो करेगा