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नम्रता से रहना येशु ने कहा
अपने आप को छोटा कर येशु ने कहा
धन्य है वह जो नम्र हैं
पृथ्वी के अधिकारी होंगे
धन्य हो तुम जब मेरे कारण सताए जाते हो
तुम्हारे विरोध बातें करके तुम्हारी निंदा करते है
लेकिन आनंदित और मगन होना
तुम्हारा फल स्वर्ग में है
गुरु होकर भी येशु ने चलो के पाव धोए
महान प्रभु होकर भी हमारे लिए रोए
मानव जाति के लिए खुदको उसने शून्य किया
येशु ने अपने आप को ऐसा नम्र किया
महान प्रभु होकर भी सूली पे चढ़ गया
उसके जीवन से हम सबको हैं सीखना